. 5 फरवरी भीष्म अष्टमी - निर्वाण दिवस /भीष्म पितामह की जीवन गाथा

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कल से नवरात्रि आरम्भ है, और क्षत्रियों के लिए यह केवल एक साधारण त्योहार नहीं, बल्कि शक्ति और साहस का आह्वान है। क्षत्रिय हमेशा से शक्ति के उपासक रहे हैं, और यह समय है अपनी कुल देवी की आराधना करके अपने भीतर हर मुश्किल में भीड़ जाने के साहस को जागृत करने का। कुल देवी की पूजा का मकसद सिर्फ श्रद्धा नहीं, बल्कि उस अदम्य शक्ति को प्राप्त करना है जो हर चुनौती को कुचल सके।
जैसे हमारे पूर्वजों ने तलवार की धार पर अपनी कुल देवी की पूजा की, वैसे ही ।हमे भी अंधविश्वास और पाखंड से दूरी बना के पूरी शक्ति और क्षत्रियोचित विधि-विधान के साथ अपने कुल देवी की आराधना करनी चाहिए। यह पूजा केवल रस्म अदायगी नहीं, बल्कि क्षत्रियों के लिए वीरता और सम्मान की प्रतिज्ञा है। जब हम कुल देवी की पूजा करते हैं, तो हम अपनी परंपरा, अपने पूर्वजों और उस अपराजेय शक्ति की आराधना करते जो हमें लड़ने और जीतने का सामर्थ्य देती है।
क्षत्रिय का धर्म है युद्ध करना, और यह युद्ध केवल बाहरी दुश्मनों से नहीं, बल्कि भीतर की कमजोरियों से भी है। हमारी कुल देवी हमें न केवल बाहरी शत्रुओं को हराने की शक्ति देती हैं, बल्कि भीतर की कमजोरी, भय और असमंजस को भी नष्ट करती हैं। इसलिए, जैसे हमारे पूर्वज अपने कुल देवी ओर इष्ट देवी की पूजा करते थे, हमें भी उसी उग्रता और साहस के साथ उनकी आराधना करनी चाहिए। यही पूजा हमें अदम्य शक्ति और हर परिस्थिति में लड़ने का साहस देती है।
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